Badshah Ki Paheli - Akbar Birbal Ke Rochak Kisse

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बादशाह अकबर को पहेली सुनाने और सुनने का काफी शौक था। कहने का मतलब यह कि पक्के पहेलीबाज थे। वे दूसरों से पहेली सुनते और समय-समय पर अपनी पहेली भी लोगों को सुनाया करते थे। एक दिन बादशाह अकबर ने बीरबल को एक नई पहेली सुनाई, 'ऊपर ढक्कन नीचे ढक्कन, मध्य-मध्य खरबूजा। मौं छुरी से काटे आपहिं, अर्थ तासु नाहिं दूजा।' बीरबल ने ऐसी पहेली कभी नहीं सुनी थी। इसलिए वह चकरा गया। उस पहेली का अर्थ उसकी समझ में नहीं आ रहा था। अत: प्रार्थना करते हुए बादशाह से बोला, 'जहांपनाह! अगर मुझे कुछ दिनों की मोहलत दी जाए तो मैं इसका अर्थ अच्छी तरह समझकर आपको बता सकूंगा।' बादशाह ने उसका प्रस्ताव मंजूर कर लिया। बीरबल अर्थ समझने के लिए वहां से चल पड़ा। वह एक गांव में पहुंचा। एक तो गर्मी के दिन, दूसरे रास्ते की थकन से परेशान व विवश होकर वह एक घर में घुस गया। घर के भीतर एक लड़की भोजन बना रही थी।

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