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Jo Lagatar Chalte Rahe - Prince Jain

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Story types

Language Hindi
Content Maturity All Audiences - Age Below 13
Length Short

Story Outline

जो बीच राह मे बैठ गये, वो बैठे ही रह जाते हैं। जो लगातार चलते रहते, निश्चय ही मंजिल पाते हैँ॥ माना की दूर किनारा है, फिर सागर ने ललकारा है। तब बैठे रहना हाँथ बांध, वीरोँ का नहीँ गंवारा है॥ जो गहरे जल मे जाते हैँ, वे ही तो मोती पाते हैँ। जो लगातार चलते रहते........ वे कायर हैँ जो हार गये, नर नाहर बाजी मार गये। इन तूफानोँ से टकराकर, हिम्मत वाले उस पार गये॥ जो तकदीर बदलने निकलेँ हैँ, वे गीत जीत के गाते हैँ। जो लगातार चलते रहते........ माना गहरा अंधियारा है, पर हमने कब स्वीकार है। हम दीपक से जलते रहते, हमसे पग पग उजियारा है॥ जो आगे बढ़ते जाते हैँ, वे ही नवपथ दिखलाते हैँ। जो लगातार चलते रहते.......

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