Jaldi Bulakar Lao - Akbar Birbal Ke Rochak Kisse

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Language Hindi
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बादशाह अकबर एक सुबह उठते ही अपनी दाढ़ी खुजलाते हुए बोले, 'अरे, कोई है?’ तुरंत एक सेवक हाजिर हुआ। उसे देखते ही बादशाह बोले- 'जाओ, जल्दी बुलाकर लाओ, फौरन हाजिर करो।’ सेवक की समझ में कुछ नहीं आया कि किसे बुलाकर लाए, किसे हाजिर करें? बादशाह से पटलकर सवाल करने की तो उसकी हिम्मत ही नहीं थी। उस सेवक ने यह बात दूसरे सेवक को बताई। दूसरे ने तीसरे को और तीसरे ने चौथे को। इस तरह सभी सेवक इस बात को जान गए और सभी उलझन में पड़ गए कि किसे बुलाकर लाए, किसे हाजिर करें। बीरबल सुबह घूमने निकले थे। उन्होंने बादशाह के निजी सेवकों को भाग-दौड़ करते देखा तो समझ गए कि जरूर बादशाह ने कोई अनोखा काम बता दिया होगा, जो इनकी समझ से बाहर है।

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